ख़्वाब आपका

कल रात-भर आपके ख़याल ने हमें न छोड़ा कितना हसीन वह ख़्वाब था जिसे भोर हमने आँसुओं में बहाके तोड़ा   क्या कशिश थी क्या चुभन थी क्या तड़पन थी प्यार की वह थी एक शब-ए-जन्नत, जो हमारी मिलन की रात थी पर देख हमें ख़्वाबीदा जो आपने अपना रुख मोड़ा तभी वह रात विदा… Continue reading ख़्वाब आपका

गीता

हुई भोर और शंख बजे और ध्वज सबके लहराए, कुरुक्षेत्र में, धर्मयुद्ध में आर्यावर्त्त के शूर लड़ने आए ।