इज़हार के इंतज़ार में

हो सके तो अपनी मोहब्बत का

एक दफ़ा हमसे इज़हार ज़रूर कर देना,

यह हमारा वाक़या-ए-इश्क़ ताकि

क़ाबिल-ए-बयान तो बन जाए ।

 

अभी तो बस चन्द ख़ामोश लम्हों को पिरोकर

हमने दावा-ए-इश्क़ पेश रखा है,

पर एक तरफ़ा इश्क़ के कारोबार के लिए

दिलदार हमसे बड़ा चाहिए ।

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