यह इश्क़-विश्क़ कुछ नहीं

जो ख़ुमारी में काटते हैं दिन अपने

और रातों को सो न पाते हैं

जाके कह दो उनसे कि यह इश्क़-विश्क़ कुछ नहीं

है बस फ़ितूर-ए-ज़हन यह, न कि मंज़ूर-ए-ख़ुदा है ।

 

4 thoughts on “यह इश्क़-विश्क़ कुछ नहीं”

  1. जाके कह दो उनसे कि यह इश्क़-विश्क़ कुछ नहीं

    है बस फ़ितूर-ए-ज़हन यह, न कि मंज़ूर-ए-ख़ुदा है ।

     

    bagut acchi line!!”

    Liked by 1 person

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