ख़्वाब आपका

कल रात-भर आपके ख़याल ने हमें न छोड़ा कितना हसीन वह ख़्वाब था जिसे भोर हमने आँसुओं में बहाके तोड़ा   क्या कशिश थी क्या चुभन थी क्या तड़पन थी प्यार की वह थी एक शब-ए-जन्नत, जो हमारी मिलन की रात थी पर देख हमें ख़्वाबीदा जो आपने अपना रुख मोड़ा तभी वह रात विदा… Continue reading ख़्वाब आपका