In pursuit of beauty

Satyam Shivam Sundaram   मैं तसव्वुर भी जुदाई का भला कैसे करूँ मैंने क़िस्मत की लकीरों से चुराया है तुझे   How can I even imagine being separated from you? For I have stolen you from the lines of fate. -- Qateel Shifai   I can't help but wonder what goes on behind the scenes,… Continue reading In pursuit of beauty

लगता नहीं ग़म से डर

लगता नहीं ग़म से डर डर इस बात से लगता है कहीं खा-खाकर ठोकरें यह दिल पत्थर का ही न बन जाए   देखो इस चमन में यारों हैं गुल भी कई बुलबुल भी कई पर कशिश अब इश्क़ में नहीं इतनी कि वस्ल-ए-गुम-ओ-बुलबुल हो पाए   आज गोश-ए-गुल नाला-ए-बुलबुल के लिए तरस गए आज… Continue reading लगता नहीं ग़म से डर