लम्हे सुकून के

मिलते हैं ज़िन्दगी में लम्हे सुकून के कमतर ही जाती है थोड़ी दूर यह कश्ती ज़िन्दगी की और जस्बातों के तूफ़ान में गुम हो जाती है ।   कहते हैं इस भवँर के पार है साहिल-ए-ख़ुशी कहीं पर जाने किसी बिरले की ही नाँव वहाँ पहुँच पाती है । हम जैसों के नसीब में तो… Continue reading लम्हे सुकून के

ख़्वाब आपका

कल रात-भर आपके ख़याल ने हमें न छोड़ा कितना हसीन वह ख़्वाब था जिसे भोर हमने आँसुओं में बहाके तोड़ा   क्या कशिश थी क्या चुभन थी क्या तड़पन थी प्यार की वह थी एक शब-ए-जन्नत, जो हमारी मिलन की रात थी पर देख हमें ख़्वाबीदा जो आपने अपना रुख मोड़ा तभी वह रात विदा… Continue reading ख़्वाब आपका