The Monk

Our master says he was nothing without his master, and that his master was nothing without his master, and that master, two generations removed was also nothing without his master, and so on so that the chain of masters of this monastery continued ad infinitum to the very first master (may God always keep his soul close to Him) the one who was in direct communion with God Himself.

श्रीलाल शुक्ल जी की राग दरबारी

राग दरबारी सिर्फ़ एक उपन्यास नहीं बल्कि एक दर्पण है जिसमें तत्कालीन भारत और उसमें हो रहे राजनीतिक, सामाजिक और नैतिक पतन का चित्र उभरकर हमारे सामने आता है । १९६० के दशक का भारत, उसकी चुनौतियाँ, उन चुनौतियों से निपटने के लिए एक तरफ़ तो कुछ कामयाब होतीं और कई नाकाम होतीं सरकारी योजनाएँ… Continue reading श्रीलाल शुक्ल जी की राग दरबारी