आतिश-ए-इश्क़

जब आतिश-ए-इश्क़ में यह रूह ही हमारी, दहक-दहककर ख़ाक हो जाएगी एक दिन, तो फिर जहन्नुम का डर किसको है-- जहन्नुम तो महबूब के क़दमों में ही लिखा है ।